रायपुर, 01अगस्त 2026 खेती के साथ-साथ मछली पालन, पशुपालन या बागवानी करने से खेत की एक ही जमीन से कई गुना अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।किसानों को मत्स्य पालन इकाइयों पर सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है।
धमतरी जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों तथा मत्स्य पालकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की गई है। ‘VB-G RAM G’ कार्यक्रम के तहत जिला पंचायत सीईओ ने कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास विभाग की एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें विभागीय कन्वर्जेंस (अभिसरण) के जरिए जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और आजीविका के नए साधन विकसित करने की ठोस रणनीति बनाई गई।
आजीविका डबरी योजना के तहत एबिस के CSR के सहयोग से जिले के 100 चयनित फार्म पॉन्ड को विकसित किया जाएगा। इनमें पारंपरिक इंडियन मेजर कार्प (IMC) के साथ-साथ उच्च मुनाफा देने वाले झींगा पालन (Shrimp Farming) को बढ़ावा मिलेगा। जिले की मत्स्य समितियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्टोरेज (भंडारण) क्षमता बढ़ाने, कोल्ड चेन और बेहतर मार्केट लिंकेज विकसित करने पर सहमति बनी ।
स्वतंत्रता दिवस को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में नई आजीविका डबरियों, तालाबों के निर्माण और मत्स्य भंडारण अधोसंरचना के प्रस्तावों को प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा। सभी मत्स्य सहकारी समितियों को 15 अगस्त तक ऋण संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उन्हें समय पर वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जा सके।
धमतरी मत्स्य उत्पादन और जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य का आदर्श मॉडल
विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का शत-प्रतिशत उपयोग संभव होगा। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों से धमतरी को मत्स्य उत्पादन और जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य का एक आदर्श मॉडल बनाया जाएगा।
कार्ययोजना को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू करने के लिए अगले 10 दिनों के भीतर जिले के सभी विकासखंडों में ब्लॉक स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही विभागों, वैज्ञानिकों और मत्स्य समितियों के बीच रियल-टाइम संवाद के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप भी गठित किया जा रहा है।