‘इको वॉरियर’ पुरस्कारों में पर्यावरण संरक्षण के योद्धाओं का सम्मान, भूपेंद्र यादव ने दिया राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर जोर

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार समारोह और ‘इको वॉरियर’ सम्मेलन की अध्यक्षता की। भारतीय वन सेवा संघ (आईएफएसए) और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी बृज किशोर सिंह को वन एवं वन्यजीव संरक्षण में दशकों लंबे योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ प्रदान किया गया, जबकि विभिन्न श्रेणियों में 15 वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत के वन महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अवसंरचना हैं, जो जल, जलवायु, मिट्टी, जैव विविधता और आजीविका को सहारा देते हैं। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए संरक्षण में जनजातीय और वन पर निर्भर समुदायों की भूमिका पर भी जोर दिया।
यादव ने कहा कि संरक्षण का काम लगातार जटिल होता जा रहा है। वन अधिकारियों को विकास, आजीविका, मानवीय आकांक्षाओं और वन्यजीवों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाते हुए पूरे पारिस्थितिकीय परिदृश्य का प्रबंधन करना पड़ता है। भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के साथ जलवायु परिवर्तन, अप्रत्याशित चरम मौसम, दावानल, जल तनाव, पर्यावास विखंडन और आक्रामक प्रजातियां प्रमुख चुनौतियों के रूप में उभर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ऐसे परिदृश्य-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई, जिसमें वनों, वन्यजीवों, कृषि, जल, आजीविका और मानव बस्तियों को एक साथ देखा जाए। उन्होंने कहा कि संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन सेवा को भारत की प्राकृतिक पूंजी की देखरेख करने वाली सेवा बताया। उन्होंने बीट गार्ड, रेंजर्स और अन्य अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना की, जो वनों की गश्त, दावानल से निपटने और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा जैसे कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यही कर्मी संरक्षण नीतियों को जमीन पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुरस्कार समारोह में कर्नाटक कैडर के 1976 बैच के आईएफएस अधिकारी बृज किशोर सिंह को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। उनके करियर में कर्नाटक में वन सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के साथ चंदन तस्करी और डाकू वीरप्पन की गतिविधियों से निपटने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल रही है।
‘संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन’ श्रेणी में सिमलीपाल बाघ अभ्यारण्य, ओडिशा के वन संरक्षक एवं प्रभारी क्षेत्र निदेशक डॉ. प्रकाश चंद गोगिनेनी और पीलीभीत बाघ अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश के डीएफओ मनीष सिंह को सम्मानित किया गया। उन्हें तकनीक, सुरक्षा उपायों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बाघ एवं वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए पुरस्कार मिला।

‘वन्यजीव सुरक्षा और संरक्षण’ श्रेणी में कोयंबटूर, तमिलनाडु की डीसीएफ सेल्वी एस. सेनबगाप्रिया और पालमपुर वन प्रभाग, हिमाचल प्रदेश के डीसीएफ डॉ. संजीव शर्मा को सम्मानित किया गया। उनके कार्यों में समुदाय आधारित संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास और अवैध शिकार-रोधी अभियान शामिल रहे।
‘पर्यावरण संरक्षण’ श्रेणी में उत्तराखंड के भागीरथी सर्कल के वन संरक्षक धर्म सिंह मीणा और नागालैंड के वोखा के डीएफओ सुमन शिवशंकर शिवाचार डब्ल्यू.एम. को सम्मानित किया गया। धर्म सिंह मीणा को वैज्ञानिक जल संरक्षण तथा झरनों और जलधाराओं के पुनरुद्धार के लिए, जबकि सुमन शिवशंकर शिवाचार को अमूर फाल्कन की सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और दोयांग जलाशय के संरक्षण के लिए सम्मान मिला।

‘सामुदायिक जुड़ाव’ श्रेणी में अरुणाचल प्रदेश के पक्के बाघ अभ्यारण्य के डीएफओ धवन कुमार रावत और हिमाचल प्रदेश के रामपुर के डीसीएफ गुरहर्ष सिंह को सम्मानित किया गया। धवन कुमार रावत को संरक्षण को सामुदायिक आजीविका से जोड़ने के प्रयासों के लिए, जबकि गुरहर्ष सिंह को समेज बादल फटने की घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों के लिए महज छह घंटे में लकड़ी का पुल तैयार कराने के लिए सम्मानित किया गया।
‘प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग’ श्रेणी में तमिलनाडु के होसुर के वन्यजीव वार्डन एन. जयराज और बिहार के राजगीर ज़ू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम. को सम्मानित किया गया। एन. जयराज को संवेदनशील रेलवे मार्ग के पास हाथियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित निगरानी और पूर्व-चेतावनी प्रणाली के उपयोग के लिए, जबकि रामसुंदर एम. को डिजिटल बुकिंग, सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग के उपयोग के लिए सम्मानित किया गया।
‘स्पेशल जूरी अवॉर्ड’ के तहत राजस्थान के बाड़मेर की डीसीएफ सविता दहिया और तमिलनाडु के तंजावुर की डीएफओ के. कार्तिकेयनी को सम्मानित किया गया। सविता दहिया को ताल छापर घास के मैदानों के पुनरुद्धार तथा काले हिरण और चिंकारा के प्राकृतिक वास में सुधार के लिए सम्मान मिला। के. कार्तिकेयनी को ऐसे अभियान के लिए सम्मानित किया गया, जिसने हाथियों की सुरक्षा मजबूत करने के साथ क्षेत्र से 239 अवैध बंदूकें हटाने में योगदान दिया।