नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार सुबह नई दिल्ली से ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के लिए रवाना हुए। वह यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह महत्वपूर्ण बैठक 19 और 20 अक्टूबर को होने जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने रवाना होने की जानकारी देते हुए कहा कि वह इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्सुक हैं। इस बैठक में एससीओ के सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर प्रमुखता से चर्चा होगी। रक्षामंत्री ने बताया कि एससीओ की बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, संपर्क व्यवस्था, नवाचार और सांस्कृतिक एवं मानवीय आदान-प्रदान जैसे विषय बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं।
इसके अलावा, सदस्य देश आपसी सहयोग से जुड़ी मौजूदा पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। यहां संगठन के वित्तीय प्रबंधन और संस्थागत कामकाज से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। एससीओ की यह बैठक सदस्य देशों को आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का अवसर देगी। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में आपसी तालमेल मजबूत करना है, जिनसे सभी सदस्य देशों को लाभ मिल सके।
गौरतलब है कि भारत एससीओ की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। भारत ने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नए उद्यमों, नवाचार, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में पहल की है। दुशांबे में होने वाली बैठक के दौरान भारत अन्य सदस्य देशों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करेगा। साथ ही आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग आगे बढ़ाने के मार्ग तलाशे जाएंगे। एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की पिछली बैठक 18 नवंबर 2025 को रूस की राजधानी मॉस्को में हुई थी। उस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया था। इस बार ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में होने वाली बैठक में भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हो रहे हैं।
शंघाई सहयोग संगठन क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसकी शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग और संगठन के कामकाज से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है। 19 और 20 अक्टूबर की बैठक में भी सदस्य देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और साझा पहलों की प्रगति की समीक्षा पर ध्यान रहेगा। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाना है। यहां विभिन्न क्षेत्रों में जारी पहलों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।