रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान सदन में तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली। सड़क निर्माण और बजट के बीच वित्तीय स्वीकृति के मुद्दे पर विपक्ष ने दो बार वॉकआउट किया।
संजारी-बालोद विधानसभा क्षेत्र से विधायक संगीता सिन्हा ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के बजट में शामिल कार्यों की प्रगति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि 3 फरवरी 2026 तक किन-किन कार्यों को कितनी वित्तीय स्वीकृति दी गई है और कौन से प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित हैं।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि स्वीकृत राशि की जानकारी प्रपत्र के अनुसार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि वित्त निर्देश 25/2012 के तहत पहले विभागों को 3 करोड़ रुपये तक प्रशासकीय स्वीकृति का अधिकार था, जिसे स्थायी वित्त निर्देश 15/2025 (14 मई 2025) के जरिए बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है, ताकि कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 फरवरी 2026 की स्थिति में संजारी-बालोद क्षेत्र के कोई भी प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित नहीं हैं।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वीकृति की घोषणा को लेकर सवाल उठाया। मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के क्षेत्रों के काम नहीं करना चाहती। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान कृषि विभाग से जुड़े लगातार तीन सवालों के जवाब कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने दिए। इस पर विधायक अजय चंद्राकर ने सभापति से टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्री को लगातार प्रश्नों का सामना करना पड़ रहा है। सभापति ने जवाब दिया कि नेताम वरिष्ठ मंत्री हैं और पूरी जिम्मेदारी से जवाब दे रहे हैं।
लगातार वॉकआउट और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल गरमाया रहा।