रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों और सुशासन के परिणामस्वरूप प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियां सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं। किसानों को समय पर आवश्यक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन ने व्यापक और प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इससे किसानों को खेती की तैयारियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। बेहतर प्रबंधन और सरल प्रक्रियाओं के कारण किसान न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि आगामी फसल को लेकर भी आशान्वित और उत्साहित हैं।
फसल विविधीकरण को दे रहे हैं बढ़ावा कोरबा जिले के ग्राम झगरहा निवासी कृषक श्री रामरतन निकुंज, दादरखुर्द निवासी कृषक श्री लकेश्वर सिंह एवं श्रीमती अंजनी राठिया खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत सहकारी समिति सोनपुरी पहुंचे। यहां उन्होंने शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही कृषि आदान सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपनी आवश्यकता अनुसार खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री प्राप्त की। लगभग 5 से 7 एकड़ भूमि में खेती करने वाले ये किसान कृषि को अपनी आजीविका का प्रमुख आधार मानते हैं। धान उत्पादन के साथ-साथ वे मूंगफली एवं सब्जी की खेती कर फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता
कृषकों ने बताया कि खरीफ सीजन प्रारंभ होने से पहले ही समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे उन्हें आवश्यक कृषि सामग्री के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ा। उन्होंने ढैंचा एवं मूंग बीज सहित आवश्यक उर्वरकों का उठाव किया और कहा कि समय पर कृषि आदान उपलब्ध होने से खेती की तैयारियां व्यवस्थित रूप से पूरी हो रही हैं। किसानों के अनुसार समिति में सामग्री वितरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं सुगम रही, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हुई। साथ ही हरित खाद एवं वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों का रुझान भी लगातार बढ़ रहा है।
आधुनिक तकनीकों के नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से फसल बेहतर
कृषकों ने शासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने से खेती की योजना बनाना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना आसान हुआ है। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वे आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। उन्होंने बीते वर्षों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई तथा पोषक तत्वों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हुआ।