नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा के विस्तार और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में हुई प्रगति को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत किया।
शोभा करंदलाजे ने कहा कि भारत ने ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत के अनुरूप व्यापक श्रम सुधार लागू किए हैं। इसके तहत 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित कर चार श्रम संहिताओं में बदला गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना, श्रमिकों के कल्याण को मजबूत करना और एक आधुनिक, पारदर्शी तथा उत्तरदायी श्रम व्यवस्था का निर्माण करना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि युवाओं की रोजगार क्षमता वर्ष 2014 के 34 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 56 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वहीं, वर्ष 2017 से 2025 के बीच बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी भी 22 प्रतिशत से बढ़कर 38.8 प्रतिशत तक पहुंची है, जो समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
करंदलाजे ने राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने श्रम और रोजगार क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत किया है। उन्होंने कौशल और व्यवसायों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा व्यवसायों के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ वर्गीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के साथ किए जा रहे व्यवहार्यता अध्ययन की जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा तेजी से बढ़ा है। आईएलओ के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार यह दायरा लगभग 1001 मिलियन लोगों तक पहुंच चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि यह योजना रोजगार सृजन तथा महिला श्रम बल की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सम्मेलन के दौरान शोभा करंदलाजे ने रवांडा की लोक सेवा एवं श्रम मंत्री क्रिस्टीन नकुलिकियिंका के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों के बीच रोजगार सेवाओं, कौशल विकास, कार्यबल नियोजन और डिजिटल शासन में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत ने राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल के अनुभव साझा करते हुए रोजगार सेवाओं तथा कौशल मिलान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने में तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण सहायता देने का प्रस्ताव रखा।
केंद्रीय मंत्री ने श्रीलंका के श्रम मंत्री अनिल जयंत फर्नांडो के साथ भी बैठक की। श्रीलंका ने भारत के श्रम सुधारों और चार नई श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में गहरी रुचि दिखाई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सुधारों की रूपरेखा, कार्यान्वयन रणनीति और व्यापक हितधारक परामर्श प्रक्रिया की जानकारी साझा की।
शोभा करंदलाजे ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. होंगबो के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने सम्मानजनक कार्य, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज वर्ष 2015 में 19 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 940 मिलियन लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।
आईएलओ महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. होंगबो ने कम समय में भारत द्वारा सामाजिक सुरक्षा कवरेज में किए गए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में भी इस कवरेज का और विस्तार हुआ है, जिससे देश की बड़ी आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल हुई है।
114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारत ने श्रम सुधारों, डिजिटल नवाचार, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा विस्तार के अपने अनुभव साझा करते हुए समावेशी और मानव-केंद्रित विकास मॉडल को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत किया। सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी ने श्रम और रोजगार क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने का संदेश दिया।