आत्मनिर्भर भारत के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना जरूरी : जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से स्थापित अंतर-विषयक सुविधा “साथी” (SATHI) का दौरा कर वहां की वैज्ञानिक और शोध सुविधाओं की समीक्षा की।
इस दौरान उन्होंने बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर ए.के. चतुर्वेदी और विश्वविद्यालय के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि “साथी-बीएचयू” देश में उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आधुनिक वैज्ञानिक ढांचे और रिसर्च सपोर्ट सिस्टम का विस्तार कर रहा है, ताकि उन्नत तकनीक और नवाचार तक सभी की पहुंच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि “साथी”, FIST और अन्य रिसर्च सपोर्ट कार्यक्रमों के जरिए शोध, स्टार्टअप, उद्योग-शैक्षणिक सहयोग और नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। इससे विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं, MSMEs और उभरते उद्योगों को लाभ हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्पेस लैब, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए भारत का वैज्ञानिक दायरा लगातार बढ़ रहा है। कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अंतरिक्ष से जुड़े शोध कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, ताकि छात्रों और युवा शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी क्षमता विकसित हो सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने “सॉफिस्टिकेटेड एनालिटिकल एंड टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट” (SATHI) का विस्तृत निरीक्षण किया और वहां मौजूद अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों तथा अनुसंधान सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्हें बताया गया कि लगभग 72 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह केंद्र एक राष्ट्रीय स्तर की साझा वैज्ञानिक सुविधा है, जहां शिक्षण संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योगों, MSMEs और स्टार्टअप्स को आधुनिक उपकरणों और तकनीकी विशेषज्ञता की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक ढांचे को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने और भारत को उभरती तकनीकों व उन्नत अनुसंधान में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
मंत्री को जानकारी दी गई कि “साथी-बीएचयू” में सुपर रेजोल्यूशन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी, एडवांस NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी, हाई रेजोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री, क्लीन रूम फैसिलिटी, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन और आइसोटोप एनालिसिस सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इन सुविधाओं का उपयोग लाइफ साइंस, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर, सेमीकंडक्टर, फूड साइंस, पर्यावरण विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस मटेरियल्स जैसे क्षेत्रों में शोध के लिए किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह को यह भी बताया गया कि केंद्र अब तक करीब 1,100 उपयोगकर्ताओं को सेवाएं दे चुका है, 30,000 से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया है और लगभग 1,000 शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 60 से अधिक अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।
उन्होंने NABL मान्यता हासिल करने और उद्योगों के साथ मजबूत सहयोग विकसित करने के लिए “साथी-बीएचयू” की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र शोध, नवाचार और आर्थिक विकास के बीच मजबूत कड़ी बनकर उभर रहा है।