स्वदेशी नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा से बदल रहा भारत का तकनीकी परिदृश्य : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने में नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का शुभारंभ विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और महासागर आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी से अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं।
इस अवसर पर डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा बनाया गया था, जबकि देश का पहला सौर संयंत्र भी 1979 में इसी संस्था ने स्थापित किया था।
उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद सीईएल को पहले वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब संस्था दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
मंत्री ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी सीईएल का लाभ अर्जित करने वाली मिनी रत्न कंपनी में बदलना संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने इसका श्रेय नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन और वैज्ञानिकों व कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा 24 अप्रैल 2025 को जारी हुई थी और एक वर्ष से कम समय में निर्माण सुविधा का संचालन शुरू हो गया।
मंत्री ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है। साथ ही देश उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली से जुड़ी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूरी तरह स्वदेशी बन चुकी है और स्वदेशी तकनीकें राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं।